Wednesday, January 14, 2026

Bihar Liquor policy: क्या छत्तीसगढ़ में भी होगी शराबबंदी? बिहार की शराबबंदी नीति का अध्ययन करने पटना पहुंची अफसरों की टीम

शुक्रवार को बिहार की शराबबंदी नीति (Bihar Liquor policy) का अध्ययन करने के लिए छत्तीसगढ़ से आई अफसरों की टीम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की. गुरुवार को पटना पहुंची छत्तीसगढ़ की 17 सदस्य टीम का नेतृत्व छत्तीसगढ़ मद्य निषेध विभाग के कमिश्नर कर रहे हैं. ये टीम बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी कानून का अध्ययन करने के साथ ही बिहार के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस कानून के क्रियान्वयन की भी जानकारी लेगी. जिसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार को अपना रिपोर्ट सौंपेगी.

टीम का मकसद छत्तीसगढ़ सरकार को शराब नीति पर रिपोर्ट तैयार कर देना है

इस टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही भूपेश बघेल सरकार छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को लेकर कोई निर्णय लेगी. दरअसल छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने विधानसभा में शराब को लेकर कहा था कि शराब एक सामाजिक बुराई है जिसे खत्म करना है. यह किसी एक पार्टी की बात नहीं है. राज्य के सभी दलों को शराबबंदी को लेकर पार्टी से ऊपर सोचना चाहिए.
छत्तीसगढ की ये 17 सदस्य टीम पटना शराबबंदी कानून का अध्ययन करने के बाद मिजोरम जाएगी. 12 मार्च को मिजोरम के रवाना होंगी ये टीम. मिजोरम दौरे के बाद ये टीम छत्तीसगढ़ लौटे जाएगी.

विवादों में रही है बिहार की शराबबंदी नीति

आपको बता दे बिहार में 2016 से ही शराबबंदी कानून लागू (Bihar Liquor policy) है. बिहार में शराब पीना और बेचना सख्त मना है. ऐसा करने पर सजा का भी प्रावधान है. पिछले दिनों जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी शराब नीति को लेकर विपक्ष के निशाने पर थे. विपक्ष खासकर बीजेपी शराब नीति की समीक्षा की मांग कर रहा था तो प्रशांत किशोर जैसे लोग जो बिहार में अपने लिए राजनीतिक ज़मीन तलाश रहे हैं वह इस नीति को फौरन खत्म करने की सलाह दे रहे थे. लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपनी इस नीति पर इतना भरोसा था कि उन्होंने खत्म करना तो दूर उन्होंने इसकी समीक्षा से भी इनकार कर दिया था.

दिल्ली की शिक्षा नीति के बाद बिहार की शराबबंदी नीति हुई हिट

दिल्ली की आम आदमी सरकार अपनी शिक्षा सुधार नीति को लेकर हमेशा चर्चा में रहती है. उसकी नीति का अध्ययन करने देश से ही नहीं विदेशों से भी टीमें आती रही है. केजरीवाल सरकार अपनी शिक्षा नीति को देश की सबसे सफल नीति करार देते है और उसके बूते पूरे देश में वोट मांगते भी नज़र आते है. सवाल ये है कि क्या नीतीश कुमार की शराबबंदी नीति (Bihar Liquor policy) भी अब दूसरे राज्यों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है. अगर छत्तीसगढ़ की टीम आई है तो इसका ये ही मतलब है कि जनकल्याण के लिए आबकारी विभाग के राजस्व को खोना नीतीश कुमार सरकार का इतना भी बुरा फैसला नहीं था.

महिला वोटरों को लुभाती है शराबबंदी

हाल में जब (जनवरी 2023) शराबबंदी को लेकर नीतीश कुमार की सरकार जब आलोचनाओं का शिकार हुई थी तब इस नीति को लेकर किए गए बिहार सरकार के एक सर्वे ने उनका काफी साथ दिया था. बिहार रुरल लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जीविका), चाणक्य विधि विश्वविद्यालय और पंचायती राज द्वारा संयुक्त रूप से कराए गए सर्वे में खुलासा हुआ था कि राज्य की 99 प्रतिशत महिला आबादी और 92 प्रतिशत पुरूष आबादी शराबबंदी के पक्ष में है. सर्वे का कहना है कि 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक 1 करोड़ 82 लाख यानी करीब 96 प्रतिशत लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया है. यानी सर्वे की माने तो बिहार तकरीबन-तकरीबन शराब मुक्त राज्य बन गया है.
अगर पूरी तरह से आकड़ों को न भी माना जाए तो ये साफ हो गया था कि शराबबंदी (Bihar Liquor policy) महिलाओं के लिए एक लुभावना वादा है. ऐसे में इस साल के अंत में चुनाव में जाने वाले प्रदेश छत्तीसगढ़ के लिए ये एक अच्छा दाव हो सकता है. आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में जहां शराब का इस्तेमाल काफी व्यापक है, वहां मुख्यमंत्री भुपेश बघेल शराबबंदी का वादा कर महिला वोटरों को अपनी ओर आकर्षित को कर ही सकते है. वैसे भी दिल्ली हो या बिहार, केजरीवाल से नीतीश कुमार तक ने बार-बार चुनावी जीत हासिल कर ये साबित कर दिया है कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा विकास पसंद और भरोसेमंद वोटर होती हैं.

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