अहमदाबाद : 2002 में गुजरात में हुए दंगों में एक के बाद एक मामले में फैसले आ रहे हैं. दंगो के मामले की जांच के लिए बनाये गये स्पेशल कोर्ट ने आज नरोडा गांव के अंदर हुए नरसंहार के मामले में फैसला सुनाया . 2002 में नरोडा गांव में 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी. दंगों के बाद इस मामले में गुजरात के पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बंजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी समेत 86 लोगों को आरोपी बनाया गया था.
14 साल बाद नरोडा दंगा मामले में आया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान पिछले 14 साल में 17 लोगों की मौत हो चुकी है. शेष बचे 69 लोगों के खिलाफ गुरुवार को स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुनाया. इसमें दो बड़े नाम आरोपियों के तौर पर शामिल थे, गुजरात सरकार में मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू भाई पटेल उर्फ बाबू बजरंगी. स्पेशल कोर्ट ने इन दोनों के रिहा कर दिया है. फैसला सुनाते समय कोर्ट में 40 से ज्यादा आरोपी कोर्ट में मौजूद रहे.
पिछले हफ्ते पूरी हुई थी सुनवाई
आपको बता दें कि स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला 187 लोगों से पूछताछ, 57 प्रश्नों का जवाब और 13 साल की सुनवाई के बाद दिया है. इस मामले में पिछले हफ्ते शनिवार को प्रधान सत्र न्यायाधीश एस के बक्शी ने मुकदमे की सुनवाई पूरी की थी और आदेश सुरक्षित रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त-विशेष जांच दल (SIT) द्वारा जांच की गई यह नौवां बड़ा दंगा मामला है. 14 साल पहले जुलाई 2009 में 86 अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा शुरू हुआ था, इनमें से 17 को उनकी मौत के बाद छोड़ दिया गया था.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दी थी माया कोडनानी के लिए गवाही
इस मामले में 2018 में अंतिम सुनवाई के दौरान माया कोडनानी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अदालत में गवाह कठघरे में खड़ा किया, ताकि यह साबित किया जा सके कि जब दंगे हुए तो वो अपराध स्थल पर मौजूद नहीं थीं. उसने अदालत में उस विशेष दिन पर तर्क दिया जब नरोदा गाम और आस-पास के नरोदा पाटिया इलाके में एक साथ दंगे भड़क उठे, वह गुजरात विधानसभा में थी, फिर सोला सिविल अस्पताल चली गई. असरवा में उसका प्रसूति गृह, असरवा में एक सिविल अस्पताल और फिर घर चली गई
एसआईटी अधिकारियों ने कहा था कि कोडनानी पर नरोदा पाटिया जैसे ही आरोप हैं, जहां उन्होंने कथित तौर पर उस भीड़ का नेतृत्व किया, जो अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की हत्या करती रही. एसआईटी ने कुल 187 गवाहों की जांच की है, जिनमें से 113 पीड़ित और उनके रिश्तेदार, 24 पंच गवाह, 26 पुलिस गवाह और 12 डॉक्टर समेत अन्य थे.

